भारतीय मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक व्यवस्था की पक्षधर हिन्दी मासिक पत्रिका

जून  2008

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 स भोजन संकट के मूल में है अमेरिका

(संजय तिवारी)

अमेरिकी राष्ट्रपति को बयान देना पड़ा कि भारतीय लोगों के खाने से अमेरिका में कीमतें बढ़ रही हैं। अब अमेरिका के पेटू और भुक्खड़ भारतीय पेटुओं और भुक्खड़ों को ताना-उलाहना दे रहे हैं। भारतीय पेटू और भुक्खड़ पलटकर अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। बहस बदल गयी है। शब्दों और आंकड़ों का युध्द जारी है। >>विस्तार

 

 Free trade leads to hunger

(Dr Bharat Jhunjhunwala)

A study by Amsterdam-based Center of World  Food Studies indicates that the increased consumption of grains for production of meat in China will be met mostly from domestic sources and will have little impact on global prices. This will happen despite the reduction in cultivable land area from 135 million hectares to 12.9 million hectares. >>विस्तार

 

उचित पहल की दरकार (रविशंकर प्रसाद)

दिशाहीनता से दिन-प्रतिदिन संकट गहराता जा रहा है। खाद्यान्न संकट एक राष्ट्रीय समस्या है जिसके लिए एक संपूर्ण और व्यवस्थित समाधान की आवश्यकता है। हर मुद्दा एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।   >>विस्तार

अमेरिका की फूड पालिटिक्स (उमाशंकर मिश्र)

इसी को फूड पालिटिक्स की संज्ञा दी जाती है, जिसमें गोला बारूद की बजाए देशों को अधीन करने के लिए खाद्य आपूर्ति को हथियार बनाया जाता है।   >>विस्तार

गुलामी के विरुध्द नई लड़ाई की जरूरत (जवाहर लाल कौल)

इसलिए जब हम व्यवस्था को बदलने की बात करते हैं तो इसका तात्पर्य उस दासत्व से आजादी भी है। स्वतंत्रता की यह लड़ाई उससे भी बड़ी और कठिन है जो हम ने गांधीजी के नेतृत्व में लड़ी थी। तब जो गलती हुई थी वह अब नहीं होनी चाहिए। >>विस्तार

यूपीए सरकार : लडखड़ाते हुए चार साल (हिमांशु शेखर)

इस साल भी सरकार की रिपोर्ट कार्ड आई। हर बार की तरह इस मर्तबा भी इसमें सरकार ने जमकर अपने कामकाज का बखान किया है। इस रिपोर्ट कार्ड में उपलब्धियों की झड़ी लगा दी गई है। पर जमीनी हकीकत इस गुलाबी सपने से बिल्कुल जुदा है। >>विस्तार

जयपुर विस्फोट से उपजे सवाल (नवनीत वाधवा)

गुलाबी शहर कभी भी आतंकियों के निशाने पर नहीं रहा है। इसलिए यहां उस दृष्टि से सुरक्षा-व्यवस्था भी चाक-चौबंद नहीं रही। इससे साफ है कि यहां वारदात को अंजाम देना आतंकवादियों के लिए अपेक्षाकृत आसान रहा >>विस्तार

 

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 अशोक डी. पाटिल

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 शरतचन्द्र

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 प्रवीण तलवार

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 प्रमोद द्विवेदी

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