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परिदृश्य |
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जयपुर विस्फोट से उपजे सवाल |
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नवनीत वाधवा |
गुलाबी शहर जयपुर को
भी आखिरकार आतंकवादियों की बुरी नजर लग ही गई। बीते
13
मई को वहां
हुए सीरियल ब्लास्ट ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमन-चैन के लिए
मशहूर इस नगरी में उस शाम सब कुछ सामान्य था। पर एक के बाद एक पंद्रह
मिनट में हुए आठ धमाकों ने पूरे शहर के साथ देश को भी सकते में ला
दिया। इन बम धमाकों में तो तकरीबन अस्सी लोगों को काल कवलित होना पड़ा
लेकिन उनसे जुडे क़ई जिंदगियों पर इस धमाके की काली छाया हमेशा मंडराती
रहेगी।
बहरहाल,
इस हमले के लिए भी आतंकियों ने उन्हीं रास्तों को
अपनाया था, जिसका इस्तेमाल वे पहले भी
हिन्दुस्तानी समाज में भय और दहशत पैदा करने के लिए करते रहे हैं।
आतंकवादियों ने साइकिलों पर बम फिट कर रखा था। इस सीरियल ब्लास्ट को
एक किलोमीटर के दायरे में अंजाम दिया गया। इन धमाकों
का निशाना माणक
चौक,
जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार,
कोतवाली थाना,
छोटी चौपड़
और चांदपोल बाजार को बनना पड़ा।
अब एक बार यह चर्चा
फिर से गरमाने लगी है कि आखिर इन वारदातों के पीछे कौन से कारण
जिम्मेवार हैं। यह मानने वालों की भी कमी नहीं है कि इस तरह की गंभीर
घटनाएं केंद्र व राज्यों के बीच समुचित तालमेल के अभाव की ओर इशारा
करते हैं। आतंकवादी घटनाओं पर लगाम लगाने और इस भयानक समस्या से निपटने
के लिए संघीय एजंसी की गठन की मांग एक बार फिर गर्माने लगी है। इसके
लिए केंद्र ने सभी राज्यों से सहयोग करने का आग्रह किया है। हालांकि,
इसी तरह का सुझाव राजग शासन में तत्कालीन
उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने भी दिया था। तब कांग्रेस ने उसे खास
तवज्जो नहीं दी थी। पर अभी उसकी आतुरता यह साबित कर रही है कि उस समय
का उसका विरोध सियासत से प्रेरित था। इससे साफ है कि हमारे देश के
राजनीतिक दल आतंकवाद को भी अपनी स्वार्थ पूर्ति से जोड़कर देखते हैं। जो
बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस हमले की जिम्मेदारी
इंडियन मुजाहिदीन नाम के आतंकवादी संगठन ने ली है। इस संगठन का नाम
इससे पहले शायद ही किसी ने सुना हो। ईमेल के जरिए इस संगठन ने
जिम्मेदारी ली है। हालांकि,
शक की सुई बांग्लादेश के आतंकी संगठन हूजी यानी
हरकत उल जेहाद-ए-इस्लामी की ओर घूम रही है। खैर,
संगठन कोई भी हो लेकिन इस बात में तो किसी को संदेह
नहीं होना चाहिए कि इस वारदात के तार सीमा पार पाकिस्तान से जुडे हुए
हैं।
दरअसल,
जयपुर को काफी सोच समझकर आतंकवादियों ने निशाना
बनाया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि गुलाबी शहर कभी भी आतंकियों के निशाने
पर नहीं रहा है। इसलिए यहां उस दृष्टि से सुरक्षा-व्यवस्था भी
चाक-चौबंद नहीं रही। इससे साफ है कि यहां वारदात को अंजाम देना
आतंकवादियों के लिए अपेक्षाकृत आसान रहा। उल्लेखनीय है कि गुलाबी नगरी
हमेशा से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। इसलिए यहां धमाका करने
पर इसकी धमक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देना तय था। यहां के पर्यटन
पर भी असर डालने की मंशा आतंकवादियों की रही होगी। क्योंकि जिस तरह से
लगातार आतंकवादी वारदातें हो रही हैं,
उससे
हजार करोड़ के भारतीय पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ने की ही
संभावना है।
अब अहम सवाल यह है कि
आखिर आतंकवादियों के मंसूबों पर पानी कैसे फेरा जाए। इसके लिए तो सबसे
पहले देश के खुफिया तंत्र को मजबूत करने की दरकार है। इसके अलावा
सुरक्षा-व्यवस्था को तो मजबूत करना ही होगा। अपने यहां हर आतंकी वारदात
के बाद ठोस कदम उठाने का राग अलापा जाता है और कुछ दिन बाद सब लोग इस
मसले पर खामोश हो जाते हैं और मौका पाते ही आतंकवादी फिर हमला करने में
कामयाब हो जाते हैं।
ईमेल:
navneetwadhva@yahoo.co.in
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